Friday, 9 December 2011

‎"संध्या वंदन क्यों जरुरी है ?"


नियमपूर्वक संध्या करने से पापरहित होकर ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है.-रात या दिन में जो विकर्म हो जाते हैं, वे त्रिकाल संध्या से नष्ट हो जाते हैं. संध्या नहीं करने वाला मृत्यु के बाद कुत्ते की योनि में जाता है. संध्या नहीं करने से पुण्यकर्म का फल नहीं मिलता. समय पर की गई संध्या इच्छानुसार फल देती है. घर में संध्या वंदन से एक, गो-स्थान में सौ, नदी किनारे लाख तथा शिव के समीप अनंत गुना फल मिलता है. सायंकाल देवता के समक्ष दीप जलाकर उसे नमस्कार करें.SeeMore.........................

Thursday, 8 December 2011

"सुखी जीवन चाहे तो तीन बाते कभी ना भूले"


1.   तीन बातें कभी न भूलें - प्रतिज्ञा करके, क़र्ज़ लेकर और विश्वास देकर.
2.   तीन बातें करो - उत्तम के साथ संगीत, विद्वान् के साथ वार्तालाप और सहृदय के साथ  मैत्री.
3.   तीन अनमोल वचन - धन गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया और  चरित्र गया तो सब गया.
4.   तीन से घृणा न करो - रोगी से, दुखी से और निम्न जाति से.

"क्या आप जानते है एलोवेरा के इतने औषधीय गुणों को ?"


एलोवेरा (ग्वार पाठा ) का नाम आजकल बहुत चर्चित है. एलोवेरा को हम बहुत से नामो से जानते है - ग्वारपाठा, चित्र कुमारी, धृत कुमारी आदि. बहुत से फायदों की वजह से एलोवेरा को चमत्कारी पौधा कहा जाता है. घृतकुमारी का पौधा बिना तने का या बहुत ही छोटे तने का एक गूदेदार और रसीला पौधा होता है.SeeMore...........

Wednesday, 7 December 2011

‎"जतीपुरा में श्रीनाथ जी का प्राकट्य"


जब आस पास के ब्रजवासियों की गायें घास चरने श्रीगोवेर्धन पर्वत पर जाती थी तब श्रावण शुक्ल पंचमी (नागपंचमी) सं. १४६६ के दिन सद्द् पाण्डे की घूमर नाम की गाय को खोजने गोवर्धन पर्वत पर गया, तब उन्हें श्री गोवर्द्धनाथजी की ऊपर उठी हुई वाम भुजा के दर्शन हुए. उसने अन्य ब्रजवासियों को बुलाकर ऊर्ध्व वाम भुजा के दर्शन करवाये। SeeMore.............

Tuesday, 6 December 2011

‎"श्री अंग का ताप मिटाने ठाकुर जी करते है चन्दन का श्रृंगार"


एक बार माधवेंद्रपुरी जी व्रज मंडल जतीपुरा(गोवर्धन) में आये, जब वे रात में सोये तो गोपाल जी उनके स्वप्न ने आये, और बोले -पुरी! देखो में इस कुंज में पड़ा हूँ, यहाँ सर्दी, गर्मी, वरसात, में बहुत दुःख पता हूँ. तुम इस कुंज से मुझे बाहर निकालो और गिरिराज जी पर मुझे स्थापित करो? जब माधवेंद्रपुरी जी सुबह उठे तो उन्होंने व्रज के कुछ ग्वालो को लेकर उस कुंज में आये और कुंज को ध्यान से खोदा, तो मिट्टी में एक श्री विग्रह पड़ा था, उसे लेकर स्नान अभिषेक करके पुरि जी ने स्थापित कर दिया. SeeMore.................